Lancet की चेतावनी: भारत में गैर-संचारी बीमारियों (NCDs) का बढ़ता बोझ

Lancet पत्रिका की एक ताज़ा रिपोर्ट के अनुसार, जबकि विश्व के अधिकांश देशों में क्रोनिक (गैर-संचारी) बीमारियों से होने वाली मौतों की दर घट रही है, भारत में दिल की बीमारियाँ, कैंसर, मधुमेह और स्ट्रोक जैसी स्थितियों से मरने वालों की संख्या गत दशक में बढ़ी है।
रिपोर्ट बताती है कि 2010-2019 के बीच जन्म से 80 वर्ष की आयु तक किसी NCD के कारण मरने की संभावना महिलाओं के लिए 2.1 प्रतिशत बढ़ी, जबकि पुरुषों में यह बढ़ोतरी करीब 0.1 प्रतिशत रही।
विशेष रूप से महिलाओं में उम्र के 40 वर्ष के बाद और पुरुषों में 55 वर्ष के बाद इन बीमारियों से मौतों का खतरा अधिक पाया गया है।
रिपोर्ट में जीवनशैली के बदलाव—जैसे अस्वस्थ आहार, शारीरिक सक्रियता की कमी, तनाव, धूम्रपान और शराब का सेवन—इन बीमारियों के बढ़ने से जोड़कर देखा गया है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने नीति निर्माताओं से मांग की है कि रोक-थाम की रणनीतियाँ और जागरूकता अभियानों को बढ़ाया जाए। समय रहते निदान और सस्ती स्वास्थ्य सेवाएँ जनता को उपलब्ध कराना आवश्यक होगा।
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख है कि डेटा की गुणवत्ता कुछ जिलों और आयु-समूहों में पर्याप्त नहीं है, इसलिए निष्कर्ष कुछ हद तक अनिश्चितता के दायरे में आते हैं।



